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बीज मंत्र विधि

किसी भी देवता के बीज मंत्र करने की विधि
1.बीज मंत्र आप कहीं भी कर सकते हैं जरूरी नहीं है कि आप घर के मंदिर में बैठकर ही बीज मंत्र का जाप करें
2.बीज मंत्र आप बैठ कर करें और किसी आसन पर बैठकर बीज मंत्र का जाप करें
3.बीज मंत्र करते समय आपका मुख उत्तर दिशा या पूर्व दिशा में होना चाहिए

  1. हो सके तो बीज मंत्र करते समय एक दीपक जलाएं
  2. किसी भी देवता के बीज मंत्र का जाप आपको 1 दिन में 108 बार ही करना है ऐसे आप कितने भी देवताओं के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं
  3. शनि देव और राहु देव के बीज मंत्र शाम 6 बजे बात करने से ज्यादा अच्छे रिजल्ट मिलते हैं और बाकी सभी ग्रहों के बीज मंत्र दिन में कभी भी कर सकते हैं शाम 6:00 बजे से पहले
  4. बीज मंत्र का जाप आप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं रुद्राक्ष की माला ही एक ऐसी माला है जिससे आप किसी भी देवता के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं
  5. जिस देवता के बीज मंत्र का आप जाप कर रहे हैं उसे उसके वार से शुरू करें,,, जैसे सूर्य देव का रविवार से चंद्र देव का सोमवार से बृहस्पति देव का गुरुवार से मंगल देव का मंगलवार से राहु देव और केतु देव का शनिवार से इस तरह
  6. जब आप बीज मंत्र का जाप कर रहे हैं तो अपने पास एक गिलास या लौटे में पानी जरूर रखें और उस दिन के बीज मंत्र करने के बाद उस जल को आप ग्रहण( जल को पीना है) करें

What Is Kundli and How it works | जानें कुंडली के बारे में – कुंडली क्या है और कैसे काम करती है

हिंदू संस्कृति में ज्योतिष विज्ञान का बहुत बड़ा महत्व है हम जब भी कोई शुभ कार्य करने जाते हैं तो उसका मुहूर्त निकलवाते हैं और जीवन में जब उतार-चढ़ाव आते हैं तो उसका भी असर हमारी कुंडली के अनुसार हमारे जीवन पर होता है लेकिन सबसे मुख्य बात यह है कि अगर हम कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनके द्वारा दिए जाने वाले परिणाम को समझ जाएं तो विपरीत दशा में भी हम हमारी परिस्थितियों को सकारात्मक कर सकते हैं

कुंडली में लग्न कुंडली का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि लग्न कुंडली हमें हमारे जीवन की मुख्य बातें बताती है और हमारी दशाएं हमें जीवन में मिलने वाले परिणाम के बारे में बताती है और वह परिणाम सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी

लेकिन हम कुंडली के आधार पर नकारात्मक परिस्थिति को भी सकारात्मक कर सकते हैं उसके लिए हमें कुछ उपाय करने होते हैं विधि विधान के साथ में और कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है की कुंडली में हमें सकारात्मक ग्रह भी अच्छे परिणाम नहीं दे पाते हैं क्योंकि वह कुंडली में या तो मृत अवस्था में होते हैं या फिल्म वह कमजोर स्थिति में होते हैं ऐसे में हम रत्न और रुद्राक्ष के माध्यम से ग्रहों की पावर को बढ़ाकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं