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Rudraksha – Effects and its Benefits | रुद्राक्ष – उत्पत्ति, प्रभाव एवं वैज्ञानिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव शंकर भोलेनाथ के द्वारा हुई है कहा जाता है कि जब शिव शंकर भोलेनाथ ध्यान की चरम सीमाओं में थे तब उनकी आंखों से जो अश्रु गिरे उनसे रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई और इस रुद्राक्ष के पेड़ पर लगने वाले फलों को हम रुद्राक्ष के नाम से जानते हैं

वैज्ञानिक यह प्रूफ कर चुके हैं की रुद्राक्ष के अंदर बायोइलेक्ट्रिक तरंगे होती है जो हमारे औरा को सकारात्मक करती है और हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है तो कोई भी नकारात्मक ऊर्जा उसके आसपास नहीं आती है और वह बुरी नजर से भी बचा रहता है और कोई भी दुर्घटना उसके साथ घटित नहीं होती है

अगर हम विधि विधान से रुद्राक्ष धारण करते हैं तो निश्चित ही हमें रुद्राक्ष के सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं और रुद्राक्ष की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है और भले ही कुंडली में गृह नकारात्मक हो या सकारात्मक हो उसका रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है वह रुद्राक्ष आपको सदा सकारात्मक परिणाम ही देगा

What Is Kundli and How it works | जानें कुंडली के बारे में – कुंडली क्या है और कैसे काम करती है

हिंदू संस्कृति में ज्योतिष विज्ञान का बहुत बड़ा महत्व है हम जब भी कोई शुभ कार्य करने जाते हैं तो उसका मुहूर्त निकलवाते हैं और जीवन में जब उतार-चढ़ाव आते हैं तो उसका भी असर हमारी कुंडली के अनुसार हमारे जीवन पर होता है लेकिन सबसे मुख्य बात यह है कि अगर हम कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनके द्वारा दिए जाने वाले परिणाम को समझ जाएं तो विपरीत दशा में भी हम हमारी परिस्थितियों को सकारात्मक कर सकते हैं

कुंडली में लग्न कुंडली का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि लग्न कुंडली हमें हमारे जीवन की मुख्य बातें बताती है और हमारी दशाएं हमें जीवन में मिलने वाले परिणाम के बारे में बताती है और वह परिणाम सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी

लेकिन हम कुंडली के आधार पर नकारात्मक परिस्थिति को भी सकारात्मक कर सकते हैं उसके लिए हमें कुछ उपाय करने होते हैं विधि विधान के साथ में और कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है की कुंडली में हमें सकारात्मक ग्रह भी अच्छे परिणाम नहीं दे पाते हैं क्योंकि वह कुंडली में या तो मृत अवस्था में होते हैं या फिल्म वह कमजोर स्थिति में होते हैं ऐसे में हम रत्न और रुद्राक्ष के माध्यम से ग्रहों की पावर को बढ़ाकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं

World of Gemstones – Know about Gemstones and its Effects | रत्नों की दुनिया – जाने रत्न और उनके प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का वर्णन किया गया है और उपाय के रूप में रत्नों से सकारात्मक परिणाम प्राप्त किया जा सकता है अगर कोई भी व्यक्ति विधि विधान से रत्न धारण करता है तो निश्चित ही उसे उसका सकारात्मक परिणाम प्राप्त होता है लेकिन ऐसे ही कोई भी रत्न अगर हम धारण कर लेते हैं तो उसके हमें नकारात्मक परिणाम भी मिल सकते हैं क्योंकि रत्न का एक ही काम है कि जिस भी ग्रह का रत्न आपने धारण किया है वह उसकी ऊर्जा को बढ़ा देगा और अगर वह ग्रह जिसका रत्न आप धारण कर रहे हैं वह कुंडली में नकारात्मक हुआ मतलब मारक ग्रह हुआ तो मारक ग्रह की उर्जा भर जाएगी और उस ग्रह से आपको नकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे

इसलिए रत्न धारण करने से पहले कुंडली विश्लेषण करवाना बहुत आवश्यक है क्योंकि रत्न कौन सा हमें अच्छा परिणाम देगा इसके लिए हमें बहुत सी चीजों का ध्यान रखना होता है जैसे की कुंडली में वह ग्रह किस घर में बैठा है और चलित कुंडली में वह ग्रह किस घर में जा रहा है और भी ऐसी बातें देखनी होती है जिसके आधार पर यह निश्चित हो जाता है कि यह ग्रह कुंडली में कमजोर है और उसका रत्न धारण करना आवश्यक है क्योंकि जब उसका रत्न हम धारण करेंगे तो उस ग्रह की पावर बढ़ेगी और वह हमें सकारात्मक परिणाम देने में सक्षम हो जाएगा

रत्न धारण करने से पहले उसकी गुणवत्ता को भी देखना होता है और जो भी हम रत्न धारण करें वह विधि विधान से धारण करें और प्रयास करें कि हम मांस का सेवन ना करें और जितनी भी नकारात्मक चीजें होती है उनसे दूर रहें तो ही हमें रत्न रुद्राक्ष और मंत्रों का सकारात्मक परिणाम मिल पाएगा अन्यथा हम ज्योतिष के उपाय करने के बावजूद भी नकारात्मक परिस्थितियों से ही गिरे रहेंगे